Saturday, 9 December 2017

तेरे मेरे बीच

    2122 222 2221
    
इक तबस्सुम है तेरे-मेरे बीच
राह रौशन है तेरे-मेरे बीच

हमख़याली भी रच देती है कशिश 
इक सुकूं रहता तेरे-मेरे बीच

बारहा लोग लपक लेते हैं बात
गुफ़्तगू चलती तेरे-मेरे बीच

शाम-भर अपनी बतकहियों का सबब          
रंग लाया है तेरे-मेरे बीच

दूर होते ही सब लगता बेकशिश  
ये  नया मसला तेरे-मेरे बीच

साथ चलना  हो तो रहना मौजूद
हौसला-भर है तेरे-मेरे बीच 
  
                   कैलाश नीहारिका 

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