Thursday, 23 May 2019

सींग-प्रेम


क्यों न हम पाल ले सींग
किसी भी तरकीब से
नित्य करें पुष्ट और पैना उन्हें
वही हैं अभी हमारी मनभावन
धारदार अभिव्यक्ति और सृजन के उपकरण !

खूब समझते हैं हम
लोकतंत्र की वाणी से अपनी दूरी
दशकों तक फैली हो वह दूरी या
संभव  है कि हमारा सींग-प्रेम
सदियों तक फैला दे उसी  दूरी को !

नफ़रत और उपेक्षा भरी  लाल-लाल आँखों से
घूरते कभी ताकते
सुनते रहेंगे हम न्याय विमर्शों को
सत्ता के उन्माद अथवा वञ्चना में
सींग चमकाते हुए 
खोजते रहेंगे कोई पीठ
खुजलाने को
कोई ओट
लार और शौच टपकाने को !

                            कैलाश  नीहारिका