मैंने सदा चाहा
तुम्हारा प्रेमपूर्ण होना
जबकि मेरा प्रेमपूर्ण होना
दशकों से छीज रहा है
बस
यहीं सारा पेंच अड़ा है ।
मैं का विसर्जन करते हुए
मैं पुनर्नवा होने की
कोशिश में हूँ।
कविता एक ऐसी उपज है जिसकी जड़ें गहरी हैं . कविता के शब्दों से ही अर्थ नहीं झरते,उसके शब्द जिस 'स्पेस' से आवरण युक्त होते हैं, वह 'स्पेस' भी कविता कहता है.कविता को समझने के लिए उसके 'स्पेस ' का मर्म समझना ज़रूरी है . मर्मज्ञ ही हो सकता है कविता का पाठक ! कविता एक दर्द है / हम जो हैं / उससे जुदा होने का दर्द / कविता है _ कैलाश नीहारिका
मैंने सदा चाहा
तुम्हारा प्रेमपूर्ण होना
जबकि मेरा प्रेमपूर्ण होना
दशकों से छीज रहा है
बस
यहीं सारा पेंच अड़ा है ।
मैं का विसर्जन करते हुए
मैं पुनर्नवा होने की
कोशिश में हूँ।
शब्दों में
कहाँ समाती है
कविता !
झरते -झरते
निथर जाओगे
एक दिन !
हाशिये से
ख़ारिज होंगे
बेज़ुबान लोग
- कैलाश नीहारिका
मैंने नदियाँ पार कीं
बिना जल को छुए
समझ आते-आते आई कि
जो पार किये वे मात्र पुल थे
नदी के होने की बस साक्षी रही।
फिर कभी पाया कि मिट गई नदी
पता चला वह नदी नहीं
बरसाती जल का रास्ता था
बहुत बाद में जाना
नदी बारहमासी होती है
किसी हिमनद की आत्मजा।
अब तमाम नहरों-नालों
कुओं झीलों तालाबों को देखते हुए
सूझते हैं मुझे ग्लेशियर .....
यूँ तो मैं वर्षा और ओस की भी साक्षी हूँ।
ठीक समझे हो
मैं हिम के समान्तर सोच रही थी
वाष्पीकरण को भी।
उन सबके पास
अपने-अपने प्याले हैं
शायद भरे हैं
किसी के हाथ में थमा
किसी के अधरों से सटा
और किसी का मेज़ पर
धरा है ढका ।
किसी-किसी के होंठों के कोनों से
रिसती बारीक धार
चुगली-सी करती है कि
पीना नहीं आता उनको।
जिनके होंठों से कभी नहीं रिसता तरल
वे पीने में पारंगत हैं
या शायद उनका प्याला ही खाली हो !
जो भी हो
यह निजता का मुद्दा है ।
थामा है कौशल से मैंने अपना प्याला
अधरों से सटा रखा है
रिसता नहीं तरल
सोचते होंगे वे -- आता है इसे पीना
या खाली भी हो सकता है प्याला !
- कैलाश नीहारिका
कविता लिखना
जूता गाँठना नहीं है कि
जिसकी आवश्यकता और उपयोगिता सामने हो .
कविता लिखना उच्छवास छोड़ने से पहले
उसे लय देना है.
उच्छवास में भले ही कुछ भी सहेजा गया हो ---
मूलभूत आवश्यकताओं से लेकर
अनदिखी प्रबल एषणाओं तक !
पर कविता में रची-बसी वह लय
किसी प्रज्ञा की गहराई से निकल
पाठक की प्रज्ञा को गले लगाती है
भरपूर अपनापे से !
- कैलाश नीहारिका