Sunday, 10 November 2013

खास पल

    212 222 1222

खास पल ही कोई रहा होगा
आपसे हाले-दिल कहा होगा

परवरिश सपनों की नहीं आसां 
किस तरह जाने सब सहा होगा

देखके उसकी रंगतो-ख़ुशबू
गुफ़्तगू-भर शहद उमड़ा होगा

फिर निगाहों से थामके वादा
पास चुपके-से रख लिया होगा 

एक शोले को समझके जुगनू  
कौन आतिश से यूँ  बचा होगा

                           कैलाश नीहारिका
        ( गगनाञ्चल  में प्रकाशित )

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