Wednesday, 11 May 2011

हिला गया मौसम


     2122 12 1222

सब्ज़   पत्ते  गिरा  गया  मौसम
क्या पहेली  बुझा  गया मौसम

राह  तकते   खड़े  रहे सपने
फिर मिलेंगे सुना गया  मौसम

दर्द   बोये   गये   बहुत गहरे
फिर बरस के रुला गया मौसम

लरज़ उठती ज़मीन रह-रह कर
जलजले-सा  हिला गया मौसम

यूँ   अधूरी   रही  उड़ान यहाँ
रौंद के  पर चला गया  मौसम

               कैलाश नीहारिका 

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