Thursday, 12 January 2023

ज़िक्र चिथड़ों का

 

ताकते नूर खिलते मुखड़ों का
कौन बनता मसीहा लिथड़ों का
 
इस नुमाइश भरी दुनिया में तुम
मत करो ज़िक्र अब उन चिथड़ों का

एक गुलज़ार-सा बंगला देखा
और देखा तमाशा उजड़ों का

जब चमकते मिलें छुरियाँ-काँटे
कौन मातम मनाए बिछुड़ों का

तल्खियां बढ़ गईं जब दामन में
पूछने हाल निकले पिछड़ों का

वे भरे पेट बस मुस्कान लिए
खून मिक़दार जाँचें निचुड़ों का

यह लिबासों लदा संसार सदा
कौन लेखा करेगा बिगड़ों का

             -- कैलाश नीहारिका

No comments:

Post a Comment