बेहुनर हाथ किसी काबिल बना लूँ तो चलूँ
आस की डोर हथेली में थमा दूँ तो चलूँ
मोड़ दर मोड़ मिलेंगे राह भूले चेहरे
ठेठ पहचान निगाहों में बसा लूँ तो चलूँ
रात-भर नींद करेगी बेवफ़ा-सी बतकही
जश्न की साँझ अँधेरों से बचा लूँ तो चलूँ
पाँव नाज़ुक उलझ गए कंकरीली राह से
अजनबी राह अभी अपनी बना लूँ तो चलूँ
रोज़ क्या साथ रहेंगे फुरसतों के सिलसिले
धूल में लीन हुए लम्हे उठा लूँ तो चलूँ
कैलाश नीहारिका