Friday, 21 June 2019

तृप्ति



शब्द बहते नहीं, तैरते हैं
इसी तैराकी के अभ्यास में
उन्हें पुष्ट  होते देख
मैं तृप्त होती हूँ ।
      

Monday, 17 June 2019

पगडण्डियों के छलावे

जंगलों की कच्ची गन्ध सहेजते
शिराओं-सी पगडण्डियाँ
मोहक लगती हैं मुझे
पहुँचते हैं पथिक ठौर पर
पगडण्डियाँ नहीं पहुँचतीं
आश्वस्त नहीं हूँ पगडण्डियों के छलावे से
कि वे जोड़ती हैं ठौर से
मैं अपने क़दमों की ऊर्जा को
सहलाती हूँ
मुझे प्यार है चलते रहने से !
                                     कैलाश नीहारिका